नई दिल्ली.
कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों की ओर से मांग की जा रही है कि सरकार को ईरान के पक्ष में खड़ा होना चाहिए। इन दलों का कहना है कि ईरान पर हमला और अयातुल्लाह खामेनेई के कत्ल पर भारत सरकार को सख्त रुख दिखाना चाहिए। ईरान के प्रति संवेदना व्यक्त करनी चाहिए। इसी को लेकर चर्चा की मांग भी विपक्ष कर रहा है।
इस बीच कांग्रेस ने 2003 में संसद में लाए गए प्रस्ताव की याद दिलाई है, जब अमेरिका ने ही इराक पर हमला किया था। तब इराक को 100 करोड़ रुपये की मदद की गई थी। इसमें नकद राशि और राशन आदि शामिल था। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने उस प्रस्ताव की प्रति को एक्स पर शेयर किया है। जयराम रमेश ने जो प्रस्ताव शेयर किया, उसमें लिखा था कि हम इराक के खिलाफ अमेरिका की लीडरशिप में हुए हमले की निंदा करते हैं। इराक में सत्ता परिवर्तन के लिए की गई सैनिक कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है। युद्ध के फलस्वरूप में इराक के मासूम लोगों, महिलाओं और बच्चों की वेदनाएं एक गंभीर मानवीय मसला है। यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की विशेष मंजूरी के बिना की गई है और यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ है। अत: यह सदन इराक के लोगों के लिए गंभीर संताप और गहन सहानुभूति प्रकट करता है।
इसी प्रस्ताव में आगे जानकारी दी गई थी कि नकद और सामग्री के माध्यम से 100 करोड़ रुपये की सहायता देने का फैसला लिया गया है। इसमें विश्व खाद्य कार्यक्रम के लिए 50 हजार मीट्रिक टन गेहूं देना भी शामिल है। यह भी हम विश्वास दिलाते हैं कि आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। राज्यसभा के प्रस्ताव की प्रति भी जयराम रमेश ने शेयर की है। इसमें लिखा था कि यह सदन तत्काल युद्ध समाप्ति का आह्वान करता है और गठबंधन सेनाओं की शीघ्र वापसी की मांग करता है। यह सदन संयुक्त राष्ट्र से इस बात की भी मांग करता है कि वह इराक की प्रभुसत्ता की रक्षा करे। यह सुनिश्चित करे कि इराक का पुनर्निर्माण संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में हो।
ईरानी प्रतिनिधि से मिलकर आए थे कांग्रेस के कई नेता
गौरतलब है कि ईरान के मसले पर कांग्रेस नेता ऐक्टिव हैं। सांसद इमरान मसूद ने दिल्ली में स्थित ईरान के शीर्ष नेता के प्रतिनिधि से मुलाकात की थी और संवेदनाएं प्रकट की थीं। इसके अलावा ईरानी दूतावास में भी एक श्रद्धांजलि आयोजन हुआ था। इसमें भी कई नेता पहुंचे थे। वरिष्ठ वकील और राज्यसभा के सांसद कपिल सिब्बल भी इस आयोजन में गए थे।

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