नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने EWS आय सीमा और निजी मेडिकल कॉलेज फीस को लेकर याचिका खारिज कर दी है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि निजी कॉलेजों को सरकारी कॉलेजों जैसी फीस लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता क्योंकि सरकारी संस्थानों को सरकार से अनुदान मिलता है. जस्टिस बी वी नागरत्ना ने टिप्पणी करते हुए कहा कि निजी कॉलेजों में अगर कोई छात्र फीस वहन नहीं कर सकते तो स्कॉलरशिप समेत अन्य विकल्प जैसे सबवेंशन या अन्य वित्तीय सहायता के विकल्प उपलब्ध हैं. जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि सरकारी संस्थानों को सरकार से अनुदान मिलता है, जबकि निजी संस्थान अपनी फीस से चलते हैं और अगर निजी मेडिकल कॉलेजों को पर्याप्त फीस लेने से रोका गया तो चिकित्सा शिक्षा में उनका योगदान प्रभावित होगा।
जो वहन नहीं कर सकते हैं फीस
इस मु्द्दे पर फैसला देते हुए जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि अगर कोई छात्र फीस वहन नहीं कर सकता है, तो स्कॉलरशिप, सबवेंशन या अन्य वित्तीय सहायता के विकल्प उपलब्ध हैं।
देश को डॉक्टरों की जरूरत
उन्होंने आगे कहा कि देश को अधिक डॉक्टरों की जरूरत है और निजी मेडिकल कॉलेज इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. ऐसे में निजी कॉलेजों की फीस अधिक है केवल इसलिए उन्हें सरकारी कॉलेजों के बराबर फीस लेने का आदेश नहीं दिया जा सकता. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया कि इस मामले से जुड़ा कोई व्यापक कानूनी प्रश्न भविष्य में उठाया जा सकता है।
राजस्थान का भी उठा मामला
वहीं, राजस्थान हाईकोर्ट ने भी निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस संरचना को वैध माना था और कहा था कि राज्य की फीस नियामक समिति द्वारा सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार ही फीस तय की गई है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की 8 लाख रुपये के वार्षिक आय सीमा और निजी मेडिकल कॉलेजों की ऊंची फीस के बीच कथित विरोधाभास को लेकर राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल की गई अपील पर सुनवाई के बाद उसे खारिज कर दिया।

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